देख लिया मैंने भी दुनिया,
अब मरना बेकार नही ,
मृत्यु सत्य है, मृत्यु अटल है,
दुनिया से किंचित रार नही,
बहुतों को मैंने आते देखा,
बहुतों को मैंने जाते देखा,
पहले डरता जब ज्ञान नही,
अब जान गया संसार यही,
तो मृत्यु से न डरता हूँ,
भय मुक्त सा होकर चलता हूँ,
कर्म यही कुछ काम करूँ,
जग में मैं अपना नाम करूँ,
जब कभी बात अमर की हो,
मैं मृत होकर भी अमर रहूँ,
अब यही है आशा मन मेरे,
जग भूले न यह जतन मेरे,
अब मृत्यु से न डरता हूँ,
मैं निडर सा होकर चलता हूँ
परिचय नाम-सुधांशु तिवारी "वात्सल्य श्याम" मोबाइल नंबर- 8858986989 सोशल मीडिया- vatsalyshyam
बुधवार, 29 मई 2019
मृत्यु ......
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
-
वो आज रो रही थी! कौन?? अरे वही!जिसके बग़ैर, आजकल मुझे जीना नही आता है, वही जो मेरी हर बात को, दिल से लगाती है, अरे पागल और कौन वही, ज...
-
उसने मेरी हर बात को, मज़ाक समझा था, जो उसकी हम दिन रात बातें करते थे, उसने उन बातों को भी बेबाक समझा था, ग़लत वो आज हमें ही कह रही हैं, ज...
-
वर्ल्ड कप आज भी याद है हमें, उस बार सबको विश्वास था, इस बार का वर्ल्ड कप, बहुत कुछ ख़ास था, सचिन के सपनों का अरमान था, धोनी को भी बनना ...
बहुत अच्छा लिखा है आपने बहुत अच्छा
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद भाई😍😍😍
हटाएं