सोमवार, 23 मार्च 2020

मेरी बात

आप सबके बीच उपस्थित हूँ एक अकविता के साथ आशा है आप सबको पसन्द आएगी...

खैर डरते डरते ही सही,
पर उस लड़के ने आज वो बात कही,
जिसकी वज़ह से वो बेचैन रहता था,
और हुआ क्या शायद नाराज़गी थी ,
जिसका उसको पहले से ही अंदेशा था,
वो किसी से अपनी बात न कहता था,
चाहे कितना भी जरूरी क्यों न हो,
जो भी मिल जाये उसी में खुश रहता,
किसी से शायद कोई उम्मीद न थी,
य उसने उम्मीद करना ही छोड़ दिया था,
जो भी था पर आज उसने कुछ माँगा था,
मिला क्या उसे कुछ भी पता नही पर हाँ,
उसके प्रश्नों का उत्तर जरूर मिल गया,
निशब्द रह गया घर का वो कोना भी,
फ़िर अंत में किसी ने कहा उससे ,
चलो सो जाओ सोने का समय हो गया,
बात बीच में ही छोड़कर वह चला गया,
और दे गया सबके मन में एक सवाल,
क्या जाति बिरादरी उसकी ख़ुशी से बड़ी है??
अगर नही तो अनकही किताब ने उसे छोड़ा क्यों??
उसने कहा था कि पापा पंडितों को न मानते,
तुम समझो हम मिल न सकते इस बार पर
अगली बार हम एक ही जाति में जनम लेंगे,
फिर हम अपने हिस्से की खुशी तब मनाएंगे ,
अगर ये भी नही हुआ तो ऐसी जगह जनम लेंगे,
जहाँ धर्म जाती इन सबसे ऊपर लोग हो,
जहाँ सिर्फ एक दूसरे की खुशियां दिखे,
और कुछ भी नहीं.....................

वात्सल्य श्याम

शनिवार, 14 मार्च 2020

ओ खुदा तू बता !!!!

ओ खुदा तू बता,
क्या इतना मैं ग़लत था,
है जुदा अब रास्ता,
क्या  चाहा मैं यही था...

रो रहा मैं सुनो,
अब तो तुम खुश हो,
मर रहा मैं सुनो,
जीना भी तो तुम हो..

जो कहा न रहा ,
जिंदगी का क्या पता,
सुन जरा साहिबा,
अब तो तुम खुश हो....


जा रहा मैं सुनो,
यम के उस निवास में,
खुश रहो तुम सदा,
दुनिया के वास में ....

ओ रे हवा रे पुरवइया !!!!!

ओ रे ! हवा रे ! पुरवइया
मेरा इतना सा कर दे काम,
मैंने लिखा है खत सुन ले तू,
पहुँचा दे उस पार.....

अब आजा मेरे प्यार,
तू आजा मेरे यार......!!!


कह देना अब न जी पाऊँ ,
तेरे बिना सुन मर जाऊँ,
मत जा तू मेरे प्यार,
अब दम घुटता है यार......

अब आजा मेरे प्यार,
तू आजा मेरे यार......!!!

तेरे लिए आसान बहुत है,
मेरे बिना सब काम बहुत है,
पता हमे भी भूल गई तू,
पर तू मेरा संसार......

अब आजा मेरे प्यार,
तू आजा मेरे यार......!!!

माना मैं तो बहुत बुरा हूँ,
तेरे लिए मैं ख़ुद से लड़ा हूँ,
माफ़ तू कर दे यार,
मत जा तू मेरे प्यार ......

अब आजा मेरे प्यार,
तू आजा मेरे यार......!!!!


कहना सबने है समझाया,
पर लड़का ये समझ न पाया,
चार दिनों से भूखा प्यासा,
करता रहा इंतज़ार.....

अब आजा मेरे प्यार,
तू आजा मेरे यार......!!!!!!!

मतलबी दुनिया 🙏

1.तुमसे दिल लगा कर गलती की थी मैंने,
तुम्हे अपना बना कर गलती की थी मैंने,
सुनो टूटकर चाहा था तुम्हे ज़ालिम बेवफ़ा,
पर इतना चाहकर भी  गलती की थी मैंने।।

रोकर गिड़गिड़ाकर गलती की थी मैंने
इतना गिरकर भी ग़लती की थी मैंने,
सबने तुम्हें ग़लत ही कहा था बेवफ़ा,
पर तुम्हे अपनाकर गलती की थी मैंने।।।

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2.तेरे जाने के बाद ख़ुद को आवारा बना लिया था,
मैंने तो सिगरेट को अपना सहारा बना लिया था,
जब जब कहि भी तेरी याद आई मुझे हर बार सुनो,
मैं मयखाने पहुँचकर उसी को किनारा बना लिया था....


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3.तुम्हारी धड़कन जब जब बढ़ेगी,
समझना मेरी रूह तुमसे मिलेगी,
जा तो रहा हूँ इस बदलती दुनिया से,
पर मेरी याद तेरे दिल में हमेशा रहेगी।।।।


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शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020

दूर मुझसे कहीं ...


दूर मुझसे कही तुम चले जाना न,
तुम किसी और कि जान हो जाना
रोज़ सजदा करूँ मैं तेरे नाम की,
तुम किसी और की चाँद हो जाना न।1।

तुम रहो बस मेरी ये दुआ मैं करूँ,
सिर्फ़ तेरे लिए मैं व्रत भी रखूँ,
जो ये बदल हूँ मैं तो बदल जाना न
दूर मुझसे कहि तुम चले जाना न ।2।

तुम भी कर लो इरादा इतना प्रिये
साथ मेरे व तेरा जनम भर रहे
तुम सुनो गैर की रानी बन जाना न,
स्वप्न में भी कभी छोड़के जाना न ।3।

दूर मुझसे कहि तुम चले जाना न
तुम किसी और कि जान हो जाना न।।

शनिवार, 11 जनवरी 2020

कहो प्रिये!!!

कहो प्रिये!!!
क्या याद न आती??
तुमको अब तो मेरी,
कहो तुम्हे !!!
क्या अब न होती??
उन शामों को देरी,
कहो तुम्हे!!
क्या फिकर न होती,
तुमको अब तो मेरी।।
तुमको सूरज चाँद कहा था,
पता तुम्हे तो होगा,
तुमको हमने तारा कहा था,
याद तुम्हे वो होगा,
वो तारा अब टूट गया है,
उसका छाया छूट गया है,
कैसे ख़ुद ये समझाए,
कैसे दिल को ये बहलाये,
तुमने तो है ढूढ़ लिया वर,
किसको ये अब राधा बुलाए,
किसका कान्हा अब कहलाए,
तुम भी तो न जीना सीखा,
मुझको इतना तुम बतला दो
कैसे जिए बेचारा???
कहो तुम्हे !!!
क्या वो खुश रखता,
नैनों से न आसूँ बहता
कहो कभी!!
क्यों खबर न लेती
तुम तो अब तो मेरी,
कहो तुम्हे !!
क्या फिकर न होती,
तुमको अब तो मेरी।।।।।।

गुरुवार, 2 जनवरी 2020

किस्सा

जागकर के वो मेरी प्रीतम,
अपने दिल को मुझको सुना दो,
हाल दिल का उधर भी यही है,
इक बार फिर से किस्सा बता दो।।

रात भर तुमसे बातें वो करना,
मुझको फ़िर से वो राते दिला दो
मैं तुम्हारा ही हूँ ऐसा कहकर,
मुझ पर अपने हक़ को जता दो।।

माजरत जो हुई है मेरे दिल से,
इस हिमाक़त दिल को सज़ा दो,
या तो कह दो मोहब्बत है तुमसे
या यूं ही दिल को ऐसे रुला दो।।

पर कसम से वो मेरी प्रीतम
अपने दिल का अब तो पता दो,
मैं तुम्हारी ही हूँ ऐसा कहकर,
मेरे घर को फिर से बसा दो।।

बुधवार, 25 दिसंबर 2019

जो स्वयं में समर्पण

रात जुगनु में जिसको उजाला दिखे,
दोपहर को अंधेरा वो बताता रहा,
जो स्वयं में समर्पण सुन लो प्रिये,
वो स्वयं को स्वयं भू बताता रहा,
जग ये जिसको अनुपम अनूठा कहे,
फूटी क़िस्मत वो खुद की बताता रहा,
ध्येय का देवता जग ये कहता रहे,
ऐसा कुछ भी नही वो बताता रहा,
जिसके पीछे है देखो दुनिया चले,
खुद को वो अकेला क्यूँ कहता रहा,
जिसको खाने में है देखो सब कुछ मिले,
बासी रोटी की लालच वो करता रहा,
जिसके पैरों में मखमल का गद्दा बिछे,
काँटों पर ही अक्सर वो चलता रहा,
जिसका वैभव स्वयं लक्ष्मी है कहे,
वो स्वयं को यूँ निर्धन बताता रहा,
जग ने जिसको अपना सबकुछ दिया,
मोह माया वो जग को बताता रहा,
वेदना क्या उसे जग क्या अब कहे,
ख़ुद को दोषी व कायर वो कहता रहा,
चाहे दुःख हो उसे चाहे सुख हो उसे,
यादकर वो तुम्हे सब यूँ सहता रहा,
लक्ष्य जिसके कदम चूम जाती रहे,
वो स्वयं को मुसाफ़िर समझता रहा,
रात जुगनु में जिसको उजाला दिखे,
दोपहर को अँधेरा वो बताता रहा।।।।।।।

धन्यवाद

बुधवार, 18 दिसंबर 2019

अपने दिल से हम

अपने दिल से अब हम भुलाने लगे,
बढ़ गई दूरियाँ दूर जाने लगे,
वो किसी संग जो नज्र आने लगे,
उनके बिन अब हम गुनगुनाने लगे,
तुम बिन माना संगम अधूरा रहे,
फिर भी ख़ुद से तुमको मिटाने लगे,
दूरियाँ बढ़ गई दूर जाने लगे।1।

सुन लो तुमने किया जो खुदगर्ज था,
मैं कहा तो नही जो मेरा दर्द था,
उस दर्द ए जिगर को मिटाने लगे,
बढ़ गई दूरियाँ दूर जाने लगे।2।

कुछ तुम्हारी वजह जान ये जान लो,
कुछ थी मेरी सजा जान अब मान लो,
हम जुदा जो हुए तो वजह ये बनी,
मेरी बातों में तुम  हक़ जताने लगे,
अपने दिल से अब हम भुलाने लगे,
दूरियाँ बढ़ गई दूर जाने लगे।3।

अब न चैनों अमन मेरे दिल को मिले,
तुम बिना श्याम बूझो कैसे जिए,
सांस तुमको बनाया उसी सांस को,
सुन लो अब ये सितमगर दबाने लगे,
अपने दिल से अब हम भुलाने लगे,
दूरियाँ बढ़ गई दूर जाने लगे।4।


शनिवार, 23 नवंबर 2019

हम मिल न सके....

धूप भी वही था मौसम भी वही था,
पर इस बार इंतज़ार में मैं नही था,
पता चला आज अपने ख़ास से यारों,
जिंदा तो है वो पर जिंदादिल नही था।।।

मेरी बेवफ़ाई ने उसको इतना निचोड़ा था,
उसे मोहल्ले में रहने लायक न छोड़ा था,
जमाने ने ताने सुनाकर  परेशान किया था,
मेरे बदलते मिज़ाज ने हैरान किया था।।

करता क्या मैं वक़्त का खेल ही ऐसा था,
किस्मत के पेपर में मैं पहले जैसा था,
इस बार मेरे साथ वो शख्स भी रोया था,
मुझसे बिछड़कर वो भी न सोया था।।

जिंदगी आज भी तनहाई में उसे पुकारती है,
रात भर उसकी तसवीर आँखे निहारती है,
जो साथ मिला था कुछ लम्हों का ज़ानिब,
अब वही सोचकर हर रात गुजारती है।।।

हम मिल न सके इतना तो सबको पता है,
पर ये लड़का आज भी सिर्फ उसी का है,
बंधन बंध न पाया कोई बात नही नन्हों,
पर मेरी जान मेरी ईमान सब उसी का है

शुक्रवार, 15 नवंबर 2019

कुछ वक़्त दे दे .....

कुछ वक़्त दे मुझे ए मेरी बिगड़ती जिंदगी,
मैं तो खुद  लड़खड़ाते हुए सम्भल जाऊँगा।।

थोड़ा सब्र कर लो ए दुनिया के रहनुमाओं,
जो ख्याब अधूरे  उनको पूरा कर जाऊँगा।।

माना कि हार हर बार हुई मंजिल पाने की
पर  वक़्त तो दो सिकन्दर मैं भी बन जाऊँगा।।

मन  मेरा मझदार में फंसा है तो क्या हुआ,
किनारों पर ज्वार के साथ बह चला जाऊँगा।।।

यक़ी नही  मेरे किरदार पर पता है यारों,
यकी कर दिखाओ तभी दुनिया बदल पाऊँगा।।।

राम रहमान की इस  धरती पर जन्म लिया है,
ऐसे कैसे अलविदा कहकर निकल जाऊँगा।।।

जरा गौर से देख लूँ इनके शानों करम को,
फिर बात मैं भी भरी महफ़िल में रख पाऊँगा।।

माना कि मैं ज़ाहिल गवाँर  इस बड़े जहान का,
जरा वक़्त दे दो तुलसी बनकर छा जाऊँगा ।।

तुमको साथ न दे पाया मेरी प्यारी नन्हों,
समय आने दो मैं तुम्हारा हि हो जाऊँगा ।।

ले न पाया ख़ुदा का नाम तू भी तो खुदगर्ज़,
वक़्त के साथ माटी का माटी में  जाएगा।।

जिम्मेदारियों का बोझ आ गया तुम पर यार
सब्र कर लो निशा दिनकर संग चला जाएगा।।

जो नफ़रत करते हो उसके रक़ीब से यारों,
हालात इधर जान लो इश्क़ फिर हो जाएगा।।


दोस्त सखा  साथी सबकुछ कहते हो मैं माना,
मुश्किल आने पर यार का पता चल जाएगा


कोहरा होने दो आसमाँ के उस कोने में,
जमीन से ही मैं आफताब सा जल जाऊँगा।।।

कह रहा हूँ कह लेने दो सबकी हक़ीक़त को,
क्या पता कल गीत ग़ज़ल से कुछ न कह पाऊँगा।।

श्याम को उसके साथ होने का फ़र्क न पड़ता,
उसके बिना भी ग़ज़ल को मैं अब कह पाऊँगा।।।

शनिवार, 12 अक्टूबर 2019

पिता जी.....

शायद कभी मैं ये कह न पाऊँ,
पर अपनी हर परेशानी में मैं,
ख़ुद से ज्यादा आपको दुखी पाऊँ,
मुझे आज भी याद है कि,
बचपन में मैं जब कभी,
मैं बीमार होता था तो,
रात भर आपका हाथ,
मेरे सर के पास होता था,
 याद है आपको वो जब,
मेरी वजह से आप यूँ ही,
रात भर न सोये थे,
मेरे पास न होने पर,
आप भी तो रोये थे,
मेरे हर गलती पर,
मुझे डाँटकर समझाते थे,
और मेरी नाराज़गी पर,
मुझे बड़े प्यार से,
अपने पास बुलाते थे,
मेरे ख्याबों को आपने,
अक्सर हक़ीक़त में बदला,
मुझे पता है आपने ,
मेरी वज़ह से घर बदला,
मेरे एक शिकायत पर,
सारे जहान से लड़े थे,
मेरे साथ साया बनकर,
हर वक़्त खड़े थे,
शब्द नही है मेरे पास,
की मैं आप का गुणगान करूँ,
बस यही दुआ है कि,
मैं सारी जिंदगी आपका,
भगवान से बढ़कर सम्मान करूँ,
कभी जनम लूँ दोबारा,
तो आपका प्यार मिले,
ऐसी अर्जी है मेरी,
सातों जनम आपका,
ऐसा ही साथ मिले....

A Tribute To All Father's Of World..


रविवार, 6 अक्टूबर 2019

जमाने की सच्चाई..

मन समझ न पाया अब तक ये,
कैसा है जग का रंग भला,
परिणाम रहे अनुकूल तुम्हारे,
तुमसे प्यारा कोई और नही,
प्रतिकूल चुनौती मिली तुम्हे,
काँटा हो तुम कोई फूल नही,
सफल यदि तुम होते हो,
तुमसे संबंध बनाता है,
विपदा हो जो आन पड़ी,
तुम कौन हो ये दोहराता है,
पल भर मे तेरे साथ खड़ा,
पल भर में है ये दूर पड़ा,
मन समझ न पाया अब तक ये,
कैसा है जग का रंग भला,
है कौन तुम्हारा कौन पराया,
पल भर में पता चल जाता है,
विपदा जब पाँव जमाती है,
सम्बन्धी भूल ही जाता है,
यदि पैसे से हो जेब भरी,
दुख दर्द तुम्हारे सह लेगा,
जो निर्धन बनकर जाओगे,
दुत्कार तुम्हे ये हँस देगा,
मन समझ न पाया अब तक ये,
कैसा है जग का रंग भला,
इक बात कहूँ तुम सबसे मैं,
कर्तव्य हमेशा करते ही रहो,
सफल असफल इक पहिया है,
अमावस में अकेले जगते रहो,
दिनकर कभी तो निकलेगा,
ये रात्रि पहर भी बिछड़ेगा,
जब नया सवेरा आएगा,
जग गीत तुम्हारे गाएगा,
तुम सच्चाई की राह चलो,
झक मार के मंजिल आएगा,
मन समझ न पाया अब तक ये,
कैसा है जग का रंग भला।।।।।।

बुधवार, 2 अक्टूबर 2019

मैं ऐसे अकेले...

मैं ऐसे अकेले न गुपचुप सा सोता,
जो तुमने हमें यूँ भुलाया न होता,
मुझे न पता था फ़रेबी है दुनिया,
झूठी ही मुझसे मिलती थी अखियाँ,
तुम्ही ने था मुझसे वादा किया जो,
मुझे तुम गीतों गज़लों में साजों,
हमारी तड़प को था तुमने बढ़ाया,
वात्सल्य बेचारा समझ भी न पाया,
पता न था ऐसे तुम भी करोगी ,
झूठे थे वादे  व कसमें कहोगी,
कभी न भूलूँ जो तुमने किया है,
फ़रेबी है दुनिया बता जो दिया है,
उस दिन था रोया था आँखे पिरोया,
तेरे ख्याब आके कोई जब था सोया,
यही था जो करना तो क्यूँ दिल लगाया,
मेरे साथ सपनों को क्यों था बसाया,
निभाना नही था तो वादा किया क्यों,
इरादा नही था तो साथी कहा क्यों,
हमारे यकीं को था तुमने जो तोड़ा,
अभी तक किसी ने उसे न है जोड़ा,
मेरा दिल है रोता बहुत दर्द होता,
तेरी याद आती तो रातें न सोता,
तुम्हारी अभी भी शामें वही है,
मैं तो नही कोई और भी हसीं है,
मेरा क्या है मैं तो ऐसे ही रोता,
तेरी ही यादों में अब भी हूँ खोता.....

मंगलवार, 24 सितंबर 2019

बताओ क्या कहलाते है???

ये रिश्ते ये नाते,
चलो सब कुछ निभाते है,
उससे पहले हम आपके,
और आप हमारे,
बताओ क्या कहलाते है??।1।

ये कसमे ,ये वादें
ये दूरियाँ ये मजबूरियां
चलो सब तोड़ आते है
उससे पहले हम आपके,
और आप हमारे,
बताओ क्या कहलाते है???।2।


ये बंधन ये चंदन,
ये रिश्तों का संगम
चलो सब तोड़ आते है
उससे पहले हम आपके,
और आप हमारे,
बताओ क्या कहलाते है???।3।

ये किस्से ये कहानियाँ,
ये प्यार की निशानियां,
चलो सब आजमाते है
उससे पहले हम आपके,
और आप हमारे,
बताओ क्या कहलाते है???।4।

वो लैला वो मजनू
वो हीर की राँझा,
चलो सब बन जाते है
उससे पहले हम आपके,
और आप हमारे,
बताओ क्या कहलाते है???।5।


ये अंगूठी ये पाजेब
ये साड़ी ये डिब्बे,
चलो सब दे आते है
उससे पहले हम आपके,
और आप हमारे,
बताओ क्या कहलाते है???।6।

ये बिरहा ये दूरी
ये पल पल की मजबूरी,
चलो सब खत्म कर आते है
उससे पहले हम आपके,
और आप हमारे,
बताओ क्या कहलाते है??।7

ये अजीज वो बदतमीज,
ये दुनिया की खीझ,
चलो सब बदल आते है
उससे पहले हम आपके,
और आप हमारे,
बताओ क्या कहलाते है??।8।

मैं पति वो पत्नी
ये रिश्तो की चटनी,
चलो मिलकर बनाते है
उससे पहले हम आपके,
और आप हमारे,
बताओ क्या कहलाते है??।9।

सोमवार, 23 सितंबर 2019

वो आज रो रही थी!!!!

वो आज रो रही थी!
कौन??
अरे वही!जिसके बग़ैर,
आजकल मुझे जीना नही आता है,
वही जो मेरी हर बात को,
दिल से लगाती है,
अरे पागल और कौन वही,
जो खुद रोकर तुमको भी रुलाती है,
अरे!और कौन वही,
जो मेरे ख्याब में अक्सर आता है,
न जाने क्यूँ वो अक्सर,
ऐसा ही करती है,
पलभर में हँसती और ,
पलभर में रो देती है!!!!
मैं उसको बदलती दुनिया तो,
कभी नही कह सकता!!!
क्योंकि वो सिर्फ मेरी है
और हमेशा रहेगी ऐसा कहा है उसने!!!!!
नही समझ पाए तुम ???
आज तक जब से वो मिली,
हम दोनों ने कभी बात भी न किया,
खुद से खुद का साथ न दिया,
उसके आगे मैं बेबस बन जाता हूँ,
सिर्फ उसी का रहना चाहता हूँ
......


वात्सल्य श्याम

मंगलवार, 17 सितंबर 2019

तू ही मेरे जीने का जरिया हो गया....

वो सबसे छिप कर तुझसे बातें करना,
तेरे कॉल के इंतजार में रात भर जगना,
यही मेरे जीने का जरिया हो गया,
मेरी बदलती जिंदगी का नजरिया हो गया।1।

पलभर की बातों को घंटों तक बताना,
जरा सा देर होने पर प्यार से समझाना,
इक़रार इजहार में अब ढलते शाम को बिताना,
सुबह उठकर फिर से तेरी याद में ढल जाना,
यही मेरे जीने का जरिया हो गया,
मेरी बदलती जिंदगी का नजरिया हो गया ।2।

बातों बातों में तेरा जोर जोर से खिलखिलाना,
बिना कुछ बोले अपनी तारीफ़ पर शर्माना,
डर के आगे जीतने का जज़्बा दिखाना,
अपने प्यार में सबकुछ भूल जाना,
फिर वही किस्सा दोबारा दोहराना,
आपसे बात करने का नया सा बहाना,
यही मेरे जीने का जरिया हो गया,
मेरी बदलती जिंदगी का नजरिया हो गया ।3।

वो पल पल की यादों में सिमटकर के रोना,
विरह के मौसम में यादों का कोना,
मेरे हर किस्से में तेरा जिक्र होना,
यादों में तेरी अक्सर अब खोना,
मेरे दोस्तों में अब  तेरी बात होना,
तेरा नाम आने पर यादों में खोना,
यही मेरे जीने का जरिया हो गया,
मेरी बदलती जिंदगी का तु ही नजरिया हो गया ।4।

वात्सल्य श्याम
SST

रविवार, 15 सितंबर 2019

मैं कसमें वादें

मैं कसमें वादें सबकुछ बनाये रखूंगा,
जो तेरा बना हूँ ताउम्र तेरा ही रहूँगा,
नजदीक तू नही तो क्या हुआ,
तेरी हर याद को अपने सिरहाने रखूँगा,
शहर को अपने वीरान बनाये रखना,
जब आऊंगा तो सूरज बन के जल जाऊँगा,
जो काजल लगाया उसको  आँखों में बनाये रखना,
आने पर तुम्हे शमा बुझने तक तकुंगा,
दुकानें आती है तो आने दो ,
पर तेरे इश्क़ की गली में ही अपने दिल के बाजार बनाएं रखूँगा,
चेहरा नम न रखूँगा ये दूरियाँ समझकर,
अपनी महफ़िल में तुमको बनाये रखूँगा,
पर तुम्हे भी मुझ पर एतबार रखना होगा,
दूर होकर भी अपने दिल के पास रखना होगा,
हुए होंगे कई लैला मजनु पर इन सबसे अलग,
इश्क़ की दुनिया मे इतिहास बनाए रखना होगा..........


वात्सल्य श्याम

#SST

रविवार, 8 सितंबर 2019

मैं गीतों में तुमको...

मैं गीतों में तुमको गाने लगा हूँ,
वजह तो नही मुस्काने लगा हूँ,
तेरा नाम सुनकर शरम अब है आती,
मेरे ख्याब में आकर अब है सताती,
तेरी बातों को अब मैं सुनने लगा हूँ,
महफिल में तुझको मैं बुनने लगा हूँ,
कहो तो तुम्हे अब मैं चन्दा कहूँगा,
कान्हा के जैसे अब मैं लीला करूँगा,
प्रेम के राग का मैं भी तर्पण करूँगा,
विरह गीतों का मैं भी अर्पण करूँगा,
सातों जनम की कसमें मैं खाऊं,
तेरा साथ पाने को मंदिर मैं जाऊँ,
न जाने कैसे मैं तुम्हे ये बता दूँ,
तेरे नाम मे अपना सरनेम लगा दूँ,
तुम्ही अब बताओ कि कैसे कहूँ मैं,
किस्से कहानी दिल के किससे कहूँ मैं,
तुम्ही अब बताओ तुम्ही अब सुनाओ,
महफ़िल में अपनी मुझे अब बुलाओ...

वात्सल्य श्याम

मेरी बात