रविवार, 8 सितंबर 2019

वो लड़की

जिम्मेदारियों से अपने अब वो बेचैन होगी,
पता लगा है अबकी बार वो 12th में होगी,
अपने आने वाले कल के ख्याब वो सजाई होगी,
मैं तो नही हूँ पर शायद मेरी यादों को उसमें बुलाई होगी,
सफल,असफ़ल , अच्छाई, बुराई अब सब कुछ तो  मिलेगा,
इसीलिए वो अब मन में थोड़ा सा घबराई होगी,
हो सकता हो माँ बाप ने जिंदगी के बारे में बतलाया होगा,
वजह यही है तभी तो कठिनाइयों को देख मुस्कुराई होगी,
पहले ही उसने इस दुनिया मे जीना सीख लिया होगा,
तभी तो मेरे इक़रार को वो इस तरह वो ठुकराई होगी,
ख़ैर कारण व परिणाम चाहे जो कुछ भी रहा होगा,
पर हर वक़्त मेरी शायरियों में खुद को पाई होगी,
और इन्ही  को देख वो रात भर आंखों को भीगाई होगी......

बुधवार, 4 सितंबर 2019

आदर्शों का अभिवादन

ज्ञान दिया, अभिमान दिया,
अज्ञानी को पहचान दिलाया,
कभी कभी जब राह भटकता,
पकड़ कलम तब मुझे चलाया,
ऐसे गुरुओं को वन्दन है,
उनके चरणों मे अभिनंदन है,
सातों जनम मैं ऋणी रहूँगा,
उन्हें सदा ही ध्येय कहूँगा..

मेरे सारे अध्यापकों व आदर्शों को मेरा शत शत प्रणाम...

🙏🙏🙏
वात्सल्य श्याम
युवा कवि, लेखक.

मंगलवार, 3 सितंबर 2019

कहो प्रिये क्या याद न आती

कहो प्रिये क्या याद न आती,
तुमको अब तो मेरी ,
कहो तुम्ही क्या अब न होती,
उन शामों को  देरी,
कहो फ़िकर क्या अब न होती,
जानू जाने जानाँ,
तुमको सूरज चाँद कहा था,
माना था इक तारा,
तेरी राह अभी भी तकता,
ये पागल बंजारा,
तुमने कहा था तुम अपनाओ,
मुझको अपना गीत बनाओ,
कहो की क्या अब गीत न गाऊँ,
भूला बिसरा न दोहराऊं,
सब कहते है भूल गई तुम,
तुम भी उसको याद न करना,
अपने ग़ज़ल की शायरियों में,
प्रीतम प्रीतम न रटना,
कहो तुम्ही अब ये तो बता दो,
क्या तुमको अब मैं बिसराउँ,
बिरहा वाले गीत ग़ज़ल को,
तेरी याद मैं भी गाऊँ,
पर तुमको तो खबर ये होगी,
बिन तुमको किसे सपने  सुनाऊँ,
कहो तुम्ही मैं अपनी राधा,
किस भामा को बतलाऊँ,
कहो प्रिये याद न आती ,
बाते अब तो मेरी,
कहो तुम्हे क्या अब न सताती,
सूरत अब वो मेरी.....

सोमवार, 2 सितंबर 2019

अनकही दास्ताँ

आज यूँ ही मुझे तेरी याद आ गई,
वो यादें जो कुछ दिन के लिए ही,
पर मेरे जिंदगी का एक अहम हिस्सा है,
चाहे मैं दुख में रहूँ या सुख में,
उन यादों को याद किए बगैर,
मेरी रात कटती नही है,
याद है न जब हमें किसी का,
डर नही  होता था,
तुम मेरी आँखों के सामने,
और मैं तुम्हारे दिल में होता था,
क्या दिन क्या रात,
हर वक़्त बस तेरी बात,
पुरे मोहल्ले को पता था कि,
हमें करनी है आपसे बात,
वही बात जो सब जानते थे,
सब तुमको हमारा मानते थे,
अक़्सर तुम्हारा नाम लेकर,
लोग हमें सताते थे,
और हम भी तो,
 तुम्हारे नाम को  सुनकर,
बेवज़ह मुस्कुरातें थे ,
याद है तुम्हे वो जब मैं रूठा था,
बिना कुछ कहे मैं तुमसे टूटा था,
तुमने मुझे बड़े प्यार से समझाया था,
और बिन कुछ कहे इशारों में,
हमे उस बात को बताया था
 ऐसे ही कुछ बीते लम्हों  को,
आज भी मैं जब याद करता,
कभी रोता तो कभी हँस पड़ता,
पर आज भी मेरे दिल में,
बस तू ही बसती है,
चाहे जो आये मेरी जिंदगी,
तेरे सिवाय मेरी आँखों को,
कोई और  न जंचती है.....

अनकही दास्ताँ.....


वात्सल्य श्याम

शुक्रवार, 16 अगस्त 2019

मतलबी दुनिया के यहाँ किरदार अनेक है,
हर दिन बदलती यहाँ सरकार अनेक है...

शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

इश्क़-ए-वतन

               
1
सबसे प्यारा है मुझे ,
वतन की आन बान शान,
माँ भारती के लिए,
मान सम्मान  सब कुछ कुर्बान...


              2
धर्म भाषा जाति सबको पीछे छोड़ दिया,
जब से मैंने अपनी मातृभूमि से नाता जोड़ लिया...


               3
नही चाहता कि कभी तिरंगा झुक जाए
मेरे मरने पर सारा जहान रुक जाए,
ख्याहिश यही है मेरी कलम कुछ ऐसा लिख दे,
कि मादरे-ए-वतन से मुझे सच्चा इश्क़ हो जाये.....

मंगलवार, 6 अगस्त 2019

हम सबका वो अधिनायक है

शेर मिला है अबकी हमको,
भारत माँ की माटी से,
56 इंच अब देख लिया है,
उस शेर की छाती से,
सबने केवल हमें छला था,
लालच देकर वोट लिया था,
पर अबकी है मिला जो हमको,
वो सच्चा इक नायक है,
हम सबका वो अधिनायक है,
हम सबका वो अधिनायक है,
वीर शिवा की झलक दिखाता,
दुश्मन को वो मार भगाता,
नतमस्तक दुनिया है मानो,
उसकी सारी बातें जानो,
श्याम कहेगा अबकी ऐसा,
नही मिलेगा मोदी जैसा,
जनता सारी समझ गई है,
वो ही सच्चा नायक है,
हम सबका वो अधिनायक है,
हम सबका वो अधिनायक है,
राष्ट्र हित की बातें करता,
भारत माँ भारत माँ रटता,
देश की कैसे शान बढ़ा दूँ,
ऐसी बातें दिन भर करता,
अबकी लगता हमे मिला जो,
वो सच्चा इक नायक है,
हम सबका वो अधिनायक है,

वात्सल्य श्याम

मेरी बात