बुधवार, 22 मई 2019

अबकी बार वर्ल्ड कप

वर्ल्ड कप
आज भी याद है हमें,
उस बार सबको विश्वास था,
इस बार का वर्ल्ड कप,
बहुत कुछ ख़ास था,
सचिन के सपनों का अरमान था,
धोनी को भी बनना महान था,
सबकी मेहनत रंग लाई थी,
वर्ल्ड कप जितने की बारी ,
अब हमारी आई थी,
युवराज ने रंग दिखाया था,
भारत को वर्ल्ड कप जिताया था,
इस बार भी ऐसी ही,
कुछ आस जगी है,
अबकी अपने युवाओं पर,
विश्वास जगी है,
बुमराह की यार्कर,
कौन खेल पायेगा,
कोहली के शतकों को,
कौन रोक पायेगा,
हिट मैन जो चल गया,
तो शामत आ जायेगी,
अच्छे गेंदबाजों को भी,
लानत लग जाएगी,
सिंह की दहाड़ को,
कौन झेल पायेगा,
भारत को जीतने से,
कौन रोक पायेगा,
धोनी का अबकी जलवा दिखेगा,
अंतिम जो वर्ल्ड कप है तो,
जीत कर ही रहेगा,
पांड्या, राहुल को भी,
अबकी दिखाना है,
भारत की झोली में,
वर्ल्ड कप जो लाना है,
भुवी जो गेंदों को,
स्विंग पर स्विंग करायेगा,
बड़े बड़े बल्लेबाजो की,
गिल्ली को उड़ाएगा,
शमी और अहमद भी,
अबकी बतायेगा,
भारत की मजबूती का,
वजह भी बताएगा,
शंकर भी अपना,
तांडव को दिखायेगा,
ऐसे ही नही ये विजय कहलायेगा

मंगलवार, 21 मई 2019

अबकी हमने

अबकी हमने उससे ,
न बात करने की कसम खाई है,
ख्याबो में आती है,
तो आने दो,
पर हक़ीक़त में मुलाकात,
न करने की कसम खाई है,
वो हमको ग़ैर भी नही समझती,
मेरे जज्बातों से अक्सर खेलती,
जब दिल कही न लगता,
तो हमें बुलाती,
हमें रंगीन सपने दिखाकर,
खुद किसी और का हो जाती,
उन्होंने हमारे प्यार को,
मज़ाक बना कर रख दिया,
मेरे इस हँसते दिल को,
रुला रुलाकर रख दिया,
पर अबकी न हम बात करेंगे,
सपनो का सच न बोलेंगे,
हाँ ऐसी ही कसम,
हमने आज से खाई है,
सपनो में आए तो आये,
पर मेरे दिल में,
अब न समाई है...

सोमवार, 20 मई 2019

क्या तुम्हें पता नहीं???

हर मुलाकात पर,
एक ही बात पूछती हो,
मेरे संग तुम,
सपनों की रात देखती हो,
मेरे न होने पर,
तुम जो घबराती हो,
और मेरे होने पर,
अनजान जो बन जाती हो,
फिर भी हर बार,
एक ही सवाल पूछती हो,
क्या तुम्हे पता नहीं,
तुम मेरी क्या कहलाती हो,
मुझे अपने रंग में,
सुन्दर सा सजाती हो,
मेरी हर बात को बेवज़ह,
तुम जो मानती हो,
मेरे ख्याबों पर अब,
अपना हक जताती हो,
मेरी हर कमी को,
मुझसे दूर भगाती हो,
न मिलने पर तुम,
जरा सा घबराती हो,
मिलने पर खिलखिलाकर,
यूँ ही जो मुस्कराती हो,
फिर भी हर बार,
यही बात दोहराती हो,
क्या तुम्हे पता नहीं,
तुम मेरी क्या कहलाती हो?
अपनी सारी बातें,
मुझसे ही बताती हो,
मेरे नाराज़ होने पर,
आँसू जो बहाती हो,
मेरे करीब आकर भी,
दूर जो चली जाती हो,
शायद ऐसे ही मुझसे,
अपना प्यार जताती हो,
मुझे कुछ कहने पर,
दुनिया से भीड़ जाती हो,
मेरे गुस्सा होने पर,
हक़ से समझाती हो,
फिर भी हर बार,
यही बात दोहराती हो,
क्या तुम्हें पता नही,
तुम मेरी क्या कहलाती हो?
मेरे हर दर्द में,
मलहम सा बन जाती हो,
मेरी सादगी को,
बिन कुछ कहे अपनाती हो,
मेरे साथ किसी और,
का जिक्र होने पर,
तुम जो थोड़ा घबराती हो,
फिर मुझे आँख दिखाकर,
अपने पास बुलाती हो,
और जब पास होता हूँ तो,
दूर चली जाती हो,
फिर भी हर बार,
एक ही बात दोहराती हो,
क्या तुम्हें पता नहीं,
तुम मेरी क्या कहलाती हो????

शनिवार, 18 मई 2019

सब कुछ तो है .…....

सब कुछ तो है फिर भी,
कुछ खाली सा लगता है,
तेरे न होने के अहसास से,
दुनिया सवाली सा लगता है,
सुबह चाय की शुरुआत से,
रात को तकिए से बात तक,
तेरी यादें मेरे साथ होती,
और उन यादों में अक्सर,
मेरी आँखे नम होती,
याद तो होगा ही तुम्हे,
वो जब हमे सताती थी,
सुबह सुबह ही छत पर आकर,
हमे नींदों से उठाती थी,
सुबह-दोपहर-शाम तक ,
बस एक ही बात दोहराती थी,
कब कहोगे दिल की बात,
यही कहकर शर्माती थी,
मैं भी थोड़ा घबराता था,
कहने में हिचकिचाता था,
तुझसे जुदा होने के ख़्याल से,
दिल की बात न कह पाता था,
पर शायद तुमने मेरे हालात न देखे,
तेरे जाने के बाद मेरे आँख न देखे,
उन नयनों में वो बात न देखे,
अब जरुरी तो नही था कि,
दिल की बात लफ्ज़ो से बताऊँ,
तेरे बग़ैर मैं किसी और को न चाहूँ,
कहां से लाऊँ वो लफ़्ज,
जो ये बयान दे दे की,
तेरे बगैर इस दिल की बगिया में,
किसी का फूल न खिला,
लाख कोशिश के बावजूद,
मुझे तुम जैसा न मिला....

वात्सल्य श्याम

रविवार, 28 अप्रैल 2019

इक लड़की थी-2

इक लड़की थी, जो शर्माती थी,
मेरे ख्याब में अक्सर आती थी,
कभी हसती थी, कभी गाती थी,
वो हर रंग में भाती थी,
वो बोली थी जरा सुनते हो,
सपने संग न बुनते हो,
हमने सोचा ये बात सही,
इनका ये जज़्बात सही,
शायद सपने अब पूरे हो,
मेरे मन में जो अधूरे हो,
पर सपना मेरा अधूरा था,
बिन उसके संग न पूरा था,
हमने पूछा क्यों साथ चले,
वो न करके इठलाई थी,
पर उसकी न में भी,
आंखें कुछ तो कह जाती थी,
उन आँखों में वो बात छिपा था,
जो वो मुझसे छिपवाती थी,
वो लड़की जो शर्माती थी,
किसी और कि वो साथी थी,
हमको न खबर जो आती थी,
वो संग किसी के मुस्काती थी,
जो आती थी, वो आती है,
अब भी मुझको वो भाती है,
हर रोज़ बदलती किरणों संग,
वो साथ बदलकर जाती है....

गुरुवार, 25 अप्रैल 2019

अनकहा जज़्बात

पहली बार ये एहसास हुआ है,
कोई हमारे दिल के पास हुआ है,
वो रोज़ हमारे ख्याबों में आती है,
उनकी यादें रात भर हमें सताती है,
अपने अनकहे, अनजाने जज्बात से,
वो मेरे दिल को यूँ ही चुराती हैं,
फिर अपने अलग अंदाज से,
मुस्कुराते हुए चली जाती है,
उनका यूँ मुस्कुराता चेहरा,
मुझको पागल कर देता है,
दर्द दुनिया जो देती है उनके नाम पर,
उस पर दवा का असर कर देता है.......

Vatsaly shyam

मंगलवार, 23 अप्रैल 2019

इजहार-ए-इश्क़

शायद मैं तुम्हे समय न दें पाऊँ,
या कहने हुए मैं रुक जाऊं,
पर तुम पर मैं एतबार करूँगा,
हर दफ़ा सिर्फ तुमसे प्यार करूँगा,
जब रूठोगी तो मनाऊंगा, चांद, तारे न सही,
पर सारा जहांन तेरे कदमों में लाऊँगा,
तुम्हारी हर गलती पर मुस्कराउंगा,
न समझने पर प्यार से समझाऊंगा,
पर तुम पर एतबार करूँगा,
हर दफ़ा मैं तुमसे प्यार करूँगा,
पूरी दुनिया की सैर तुम्हे कराऊंगा,
तुम्हारे लिए जहांन से लड़ जाऊंगा,
जो आसमान हमसे कभी मांगोगी,
मैं तुम्हे अम्बर की रानी बनाऊंगा,
जो एक बार हां कर दोगी तो,
सातों जनम तुम्हारे साथ बिताऊँगा........

मेरी बात