उसको पहली बार था देखा,
अपने घर के दरवाजों से,
कितनी भोली चाल थी उसकी,
मतवाली मस्त हवाओं में,
धीरे धीरे वो मतवाली,
आने लगी ख़यालों में,
कुछ ऐसे जैसे बरखा,
आ जाते हैं ब्यालों में,
ऐसा पहली बार हुआ था,
सब कहते थे प्यार हुआ था...
सब कहते थे कह दूं तुमसे,
अपने दिल की बात,
तेरे आने से मिला है,
खुशियों का सौगात,
मुझे हँसा कर जाती हो,
ख्याबों में जब आ जाती हो,
सारी रात सुहाने सपने,
मुझको तुम दिखलाती हो,
कब तक ऐसा यूँ ही चलेगा,
कब दोनो का दिल मचलेगा,
कब उससे तुम बात करोगे ,
सपनो का सच कब बोलोगे।।।।।
परिचय नाम-सुधांशु तिवारी "वात्सल्य श्याम" मोबाइल नंबर- 8858986989 सोशल मीडिया- vatsalyshyam
गुरुवार, 11 अप्रैल 2019
उसको पहली बार
मंगलवार, 18 दिसंबर 2018
अधूरा लफ़्ज
अब तो चाँद तारों से,
रोज बात होने लगी है,
उगते सूरज की वो चाय,
मोहतरमा की याद में आकर,
अक्सर ठण्डी होने लगी है,
हर रात सिरहाने पर,
उनकी मीठी यादें दबाए,
मैं गुजारने लगा हूँ,
सुन लो ऐ चाँद सितारों,
मै भी अब किसी से,
इश्क़ फरमाने लगा हूँ,
ढलता सूरज, उनकी याद,
मेरी नादानी हो गई है,
मेरे पहले प्यार की,
यही कहानी हो गई है।।।।
© अधूरा लफ्ज़
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गुरुवार, 31 मई 2018
हंसता था तो.......
हंसता था तो लोग,
मुझे रूलाने आते थे,
गाता था तो लोग,
मुझे चुप कराते थे,
कुछ ऐसा था मुझमें,
कि लोग अक्सर मुझमें,
कुछ कमियां निकालते थे,
लोग कहते मुझसे अक्सर,
अपने मन की करो,
जब मन की करता,
तो लोग जाने क्यूं,
मुझसे नाराज़ हो जाते,
फिर भी मैं अक्सर,
हंसकर था टाल देता,
दुनिया के धक्के हम तो,
हंसकर था सम्भाल लेता,
पर अब मैं भी,
टूट सा गया हूं,
मेरी जिंदगी तुझसे मैं,
अब रूठ सा गया हूं।।।।।
Vatsalyshyam
मंगलवार, 29 मई 2018
तुम ना आते
तुम ना आते तो,
जिंदगी में कोई गम ना होता,
अक्सर मैं यूं अकेला गुमसुम,
किसी कोने में ना सोता,
तुम ना आते तो,
कोई यूं मुझे बदनाम ना करता,
तेरे मेरे चर्चे यूं सरेआम ना करता,
अच्छा होता जो तुम ना आते,
कम से कम मैं हंसता तो होता,
तुम ना आते तो बेरूखा सा,
अपनी जिंदगी को यूं सूखा सा,
अक्सर तेरी यादों में आके,
अपनी आंखों को जल से भीगा के,
तेरे ख्यालों में रात भर ना होते,
तुम ना आते तो जिंदगी का,
अंदाज ही अलग मेरे होता.....
Vatsalyshyam
रविवार, 6 मई 2018
मुश्किलों सा जीवन अपना
मुश्किलों सा जीवन अपना,
कैसे तुम्हें बताऊं मैं?
विद्यार्थी जीवन है अपना,
कैसे तुम्हें दिखाऊं मैं?
कभी हार है, कभी जीत है,
इससे सच्ची न कोई प्रीत है,
चाहत है उन्मुक्त गगन के,
उन शिखरों पर चढ़ जाऊं मैं,
मुश्किलों सा जीवन अपना,
कैसे तुम्हें दिखाऊंमैं?
कहीं छिपाता, कहीं दिखाता,
नित नए ये सपने सजाता,
उन सपनों के खंडन पर,
खुद को विचलित पाऊं मैं,
मुश्किलों सा जीवन अपना,
कैसे तुम्हें दिखाऊं मैं?
मेरी हार पर जग हंसे है,
शब्द न फूटे, जब शिखर पाऊं मैं,
हार जीत तो होती रहती,
दुनिया को क्यों समझाऊं मैं,
मुश्किलों सा जीवन अपना,
कैसे तुम्हें दिखाऊं मैं?
कुछ न बोलूं उस वक्त तक,
जब तक सपने न पाऊं मैं,
मुश्किलों सा जीवन अपना,
कैसे तुम्हें दिखाऊं मैं???
#vatsalyshyam
शुक्रवार, 4 मई 2018
तेरे इशारों को...
तेरे इशारों को मैं,
समझ न पाता हूं,
क्योकिमैं तुझे देखते ही,
कहीं और खो जाता हूं,
लोग जाने कैसे करते हैं,
इज़हार-ए-इश्क,
मैं जब भी सोचता हूं तो,
डरकर वापस आ जाता हूं,
डरता हूं कि कहीं,
तू मुझे बदनाम न कर दे,
मेरे इश्क के लफ़्ज़ों को,
तू सरेआम न कर दे,
कह दे तू वही बात,
जो मैं नहीं चाहता हूं,
बिछड़ने से डर लगता है,
इसीलिए कभी कह न पाता हूं,..........
#vatsalyshyam
इक याद...
कैसे कहूंगा किसी और से,
तेरे बिना अधूरा हूं,
हमने जो ख्वाब देखा था,
उनके बगैर मैं पूरा हूं,
कैसे कहूंगा अपनी खुदगर्जी से,
मैं तो निकल चुका हूं,
तेरे बिना मेरी पंडिताइन,
मैं चाहकर भी न पूरा हूं,
कैसे बचूंगा उस शाम से,
जो याद तेरी दिलाएगी,
तेरे बगैर मेरी जिंदगी,
मुझे नींद कहां आएगी,
उस वक्त मैं रो पडूंगा,
जब याद तेरी आएगी,
दिल से मैं क्या कहूंगा,
मैं तो बदल चुका हूं,
उन पतझड़ो के मौसम से,
मैं तो संभल चुका हूं,
धड़कनों से क्या कहूंगा,
जब हाल तेरा ये पूछेंगी,
कैसे कहूंगा उन से मैं,
हमको खबर न उनकी,
जिनके बगैर मेरी,
सांसें कभी न चलती,
कैसे कहूंगा मैं खुद से,
हममें इतनी गुरबत न थी,
दुनिया से लड़कर मैं कहता,
पगली तू ही सही थी............
#vatsalyshyam
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वो आज रो रही थी! कौन?? अरे वही!जिसके बग़ैर, आजकल मुझे जीना नही आता है, वही जो मेरी हर बात को, दिल से लगाती है, अरे पागल और कौन वही, ज...
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अबकी हमने उससे , न बात करने की कसम खाई है, ख्याबो में आती है, तो आने दो, पर हक़ीक़त में मुलाकात, न करने की कसम खाई है, वो हमको ग़ैर भी नह...