मुश्किलों सा जीवन अपना,
कैसे तुम्हें बताऊं मैं?
विद्यार्थी जीवन है अपना,
कैसे तुम्हें दिखाऊं मैं?
कभी हार है, कभी जीत है,
इससे सच्ची न कोई प्रीत है,
चाहत है उन्मुक्त गगन के,
उन शिखरों पर चढ़ जाऊं मैं,
मुश्किलों सा जीवन अपना,
कैसे तुम्हें दिखाऊंमैं?
कहीं छिपाता, कहीं दिखाता,
नित नए ये सपने सजाता,
उन सपनों के खंडन पर,
खुद को विचलित पाऊं मैं,
मुश्किलों सा जीवन अपना,
कैसे तुम्हें दिखाऊं मैं?
मेरी हार पर जग हंसे है,
शब्द न फूटे, जब शिखर पाऊं मैं,
हार जीत तो होती रहती,
दुनिया को क्यों समझाऊं मैं,
मुश्किलों सा जीवन अपना,
कैसे तुम्हें दिखाऊं मैं?
कुछ न बोलूं उस वक्त तक,
जब तक सपने न पाऊं मैं,
मुश्किलों सा जीवन अपना,
कैसे तुम्हें दिखाऊं मैं???
#vatsalyshyam
परिचय नाम-सुधांशु तिवारी "वात्सल्य श्याम" मोबाइल नंबर- 8858986989 सोशल मीडिया- vatsalyshyam
रविवार, 6 मई 2018
मुश्किलों सा जीवन अपना
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