शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020

दूर मुझसे कहीं ...


दूर मुझसे कही तुम चले जाना न,
तुम किसी और कि जान हो जाना
रोज़ सजदा करूँ मैं तेरे नाम की,
तुम किसी और की चाँद हो जाना न।1।

तुम रहो बस मेरी ये दुआ मैं करूँ,
सिर्फ़ तेरे लिए मैं व्रत भी रखूँ,
जो ये बदल हूँ मैं तो बदल जाना न
दूर मुझसे कहि तुम चले जाना न ।2।

तुम भी कर लो इरादा इतना प्रिये
साथ मेरे व तेरा जनम भर रहे
तुम सुनो गैर की रानी बन जाना न,
स्वप्न में भी कभी छोड़के जाना न ।3।

दूर मुझसे कहि तुम चले जाना न
तुम किसी और कि जान हो जाना न।।

शनिवार, 11 जनवरी 2020

कहो प्रिये!!!

कहो प्रिये!!!
क्या याद न आती??
तुमको अब तो मेरी,
कहो तुम्हे !!!
क्या अब न होती??
उन शामों को देरी,
कहो तुम्हे!!
क्या फिकर न होती,
तुमको अब तो मेरी।।
तुमको सूरज चाँद कहा था,
पता तुम्हे तो होगा,
तुमको हमने तारा कहा था,
याद तुम्हे वो होगा,
वो तारा अब टूट गया है,
उसका छाया छूट गया है,
कैसे ख़ुद ये समझाए,
कैसे दिल को ये बहलाये,
तुमने तो है ढूढ़ लिया वर,
किसको ये अब राधा बुलाए,
किसका कान्हा अब कहलाए,
तुम भी तो न जीना सीखा,
मुझको इतना तुम बतला दो
कैसे जिए बेचारा???
कहो तुम्हे !!!
क्या वो खुश रखता,
नैनों से न आसूँ बहता
कहो कभी!!
क्यों खबर न लेती
तुम तो अब तो मेरी,
कहो तुम्हे !!
क्या फिकर न होती,
तुमको अब तो मेरी।।।।।।

गुरुवार, 2 जनवरी 2020

किस्सा

जागकर के वो मेरी प्रीतम,
अपने दिल को मुझको सुना दो,
हाल दिल का उधर भी यही है,
इक बार फिर से किस्सा बता दो।।

रात भर तुमसे बातें वो करना,
मुझको फ़िर से वो राते दिला दो
मैं तुम्हारा ही हूँ ऐसा कहकर,
मुझ पर अपने हक़ को जता दो।।

माजरत जो हुई है मेरे दिल से,
इस हिमाक़त दिल को सज़ा दो,
या तो कह दो मोहब्बत है तुमसे
या यूं ही दिल को ऐसे रुला दो।।

पर कसम से वो मेरी प्रीतम
अपने दिल का अब तो पता दो,
मैं तुम्हारी ही हूँ ऐसा कहकर,
मेरे घर को फिर से बसा दो।।

बुधवार, 25 दिसंबर 2019

जो स्वयं में समर्पण

रात जुगनु में जिसको उजाला दिखे,
दोपहर को अंधेरा वो बताता रहा,
जो स्वयं में समर्पण सुन लो प्रिये,
वो स्वयं को स्वयं भू बताता रहा,
जग ये जिसको अनुपम अनूठा कहे,
फूटी क़िस्मत वो खुद की बताता रहा,
ध्येय का देवता जग ये कहता रहे,
ऐसा कुछ भी नही वो बताता रहा,
जिसके पीछे है देखो दुनिया चले,
खुद को वो अकेला क्यूँ कहता रहा,
जिसको खाने में है देखो सब कुछ मिले,
बासी रोटी की लालच वो करता रहा,
जिसके पैरों में मखमल का गद्दा बिछे,
काँटों पर ही अक्सर वो चलता रहा,
जिसका वैभव स्वयं लक्ष्मी है कहे,
वो स्वयं को यूँ निर्धन बताता रहा,
जग ने जिसको अपना सबकुछ दिया,
मोह माया वो जग को बताता रहा,
वेदना क्या उसे जग क्या अब कहे,
ख़ुद को दोषी व कायर वो कहता रहा,
चाहे दुःख हो उसे चाहे सुख हो उसे,
यादकर वो तुम्हे सब यूँ सहता रहा,
लक्ष्य जिसके कदम चूम जाती रहे,
वो स्वयं को मुसाफ़िर समझता रहा,
रात जुगनु में जिसको उजाला दिखे,
दोपहर को अँधेरा वो बताता रहा।।।।।।।

धन्यवाद

बुधवार, 18 दिसंबर 2019

अपने दिल से हम

अपने दिल से अब हम भुलाने लगे,
बढ़ गई दूरियाँ दूर जाने लगे,
वो किसी संग जो नज्र आने लगे,
उनके बिन अब हम गुनगुनाने लगे,
तुम बिन माना संगम अधूरा रहे,
फिर भी ख़ुद से तुमको मिटाने लगे,
दूरियाँ बढ़ गई दूर जाने लगे।1।

सुन लो तुमने किया जो खुदगर्ज था,
मैं कहा तो नही जो मेरा दर्द था,
उस दर्द ए जिगर को मिटाने लगे,
बढ़ गई दूरियाँ दूर जाने लगे।2।

कुछ तुम्हारी वजह जान ये जान लो,
कुछ थी मेरी सजा जान अब मान लो,
हम जुदा जो हुए तो वजह ये बनी,
मेरी बातों में तुम  हक़ जताने लगे,
अपने दिल से अब हम भुलाने लगे,
दूरियाँ बढ़ गई दूर जाने लगे।3।

अब न चैनों अमन मेरे दिल को मिले,
तुम बिना श्याम बूझो कैसे जिए,
सांस तुमको बनाया उसी सांस को,
सुन लो अब ये सितमगर दबाने लगे,
अपने दिल से अब हम भुलाने लगे,
दूरियाँ बढ़ गई दूर जाने लगे।4।


शनिवार, 23 नवंबर 2019

हम मिल न सके....

धूप भी वही था मौसम भी वही था,
पर इस बार इंतज़ार में मैं नही था,
पता चला आज अपने ख़ास से यारों,
जिंदा तो है वो पर जिंदादिल नही था।।।

मेरी बेवफ़ाई ने उसको इतना निचोड़ा था,
उसे मोहल्ले में रहने लायक न छोड़ा था,
जमाने ने ताने सुनाकर  परेशान किया था,
मेरे बदलते मिज़ाज ने हैरान किया था।।

करता क्या मैं वक़्त का खेल ही ऐसा था,
किस्मत के पेपर में मैं पहले जैसा था,
इस बार मेरे साथ वो शख्स भी रोया था,
मुझसे बिछड़कर वो भी न सोया था।।

जिंदगी आज भी तनहाई में उसे पुकारती है,
रात भर उसकी तसवीर आँखे निहारती है,
जो साथ मिला था कुछ लम्हों का ज़ानिब,
अब वही सोचकर हर रात गुजारती है।।।

हम मिल न सके इतना तो सबको पता है,
पर ये लड़का आज भी सिर्फ उसी का है,
बंधन बंध न पाया कोई बात नही नन्हों,
पर मेरी जान मेरी ईमान सब उसी का है

शुक्रवार, 15 नवंबर 2019

कुछ वक़्त दे दे .....

कुछ वक़्त दे मुझे ए मेरी बिगड़ती जिंदगी,
मैं तो खुद  लड़खड़ाते हुए सम्भल जाऊँगा।।

थोड़ा सब्र कर लो ए दुनिया के रहनुमाओं,
जो ख्याब अधूरे  उनको पूरा कर जाऊँगा।।

माना कि हार हर बार हुई मंजिल पाने की
पर  वक़्त तो दो सिकन्दर मैं भी बन जाऊँगा।।

मन  मेरा मझदार में फंसा है तो क्या हुआ,
किनारों पर ज्वार के साथ बह चला जाऊँगा।।।

यक़ी नही  मेरे किरदार पर पता है यारों,
यकी कर दिखाओ तभी दुनिया बदल पाऊँगा।।।

राम रहमान की इस  धरती पर जन्म लिया है,
ऐसे कैसे अलविदा कहकर निकल जाऊँगा।।।

जरा गौर से देख लूँ इनके शानों करम को,
फिर बात मैं भी भरी महफ़िल में रख पाऊँगा।।

माना कि मैं ज़ाहिल गवाँर  इस बड़े जहान का,
जरा वक़्त दे दो तुलसी बनकर छा जाऊँगा ।।

तुमको साथ न दे पाया मेरी प्यारी नन्हों,
समय आने दो मैं तुम्हारा हि हो जाऊँगा ।।

ले न पाया ख़ुदा का नाम तू भी तो खुदगर्ज़,
वक़्त के साथ माटी का माटी में  जाएगा।।

जिम्मेदारियों का बोझ आ गया तुम पर यार
सब्र कर लो निशा दिनकर संग चला जाएगा।।

जो नफ़रत करते हो उसके रक़ीब से यारों,
हालात इधर जान लो इश्क़ फिर हो जाएगा।।


दोस्त सखा  साथी सबकुछ कहते हो मैं माना,
मुश्किल आने पर यार का पता चल जाएगा


कोहरा होने दो आसमाँ के उस कोने में,
जमीन से ही मैं आफताब सा जल जाऊँगा।।।

कह रहा हूँ कह लेने दो सबकी हक़ीक़त को,
क्या पता कल गीत ग़ज़ल से कुछ न कह पाऊँगा।।

श्याम को उसके साथ होने का फ़र्क न पड़ता,
उसके बिना भी ग़ज़ल को मैं अब कह पाऊँगा।।।

मेरी बात