Upहम दोनों भी कितने बेगाने है,
सच कहने से इतराते हैं,
कभी तुम भी तो घबराती हो,
कभी हम भी तो डर जाते हैं,
तुम नज़र जो मुझसे मिलाती हो,
फिर धीरे से मुस्काती हो,
सच कहता हूं ये तेरा मुस्काना अच्छा लगता है,
उस पर भी यूं नजर घुमाना ,
मुझको घायल कर देता है,
हर सूरज के संग उठता हूं तो,
मन में खयाल ये लाता हूं,
कह दूंगा तुमसे प्यार है,
ऐसा पहली ही बार है,
तुम रोज सुबह जब आती हो,
मेरा नींद उडा़ ले जाती,
पर मैं ये न कह पाता ,
हर दिन बिन कहे ही घर जाता हूं।।।
परिचय नाम-सुधांशु तिवारी "वात्सल्य श्याम" मोबाइल नंबर- 8858986989 सोशल मीडिया- vatsalyshyam
सोमवार, 22 जनवरी 2018
कैसे कहूं 2
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
-
वो आज रो रही थी! कौन?? अरे वही!जिसके बग़ैर, आजकल मुझे जीना नही आता है, वही जो मेरी हर बात को, दिल से लगाती है, अरे पागल और कौन वही, ज...
-
उसने मेरी हर बात को, मज़ाक समझा था, जो उसकी हम दिन रात बातें करते थे, उसने उन बातों को भी बेबाक समझा था, ग़लत वो आज हमें ही कह रही हैं, ज...
-
वर्ल्ड कप आज भी याद है हमें, उस बार सबको विश्वास था, इस बार का वर्ल्ड कप, बहुत कुछ ख़ास था, सचिन के सपनों का अरमान था, धोनी को भी बनना ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें