चल अपने पथ की ओर रे,
विप्लव के दीपक प्रौढ़ रे,
कल तक जब कहीं सहारा था,
जीवन में सबकुछ प्यारा था,
घनघोर घटा अब आई है,
विपदा के बादल लाई है,
जो साथ तुम्हारे होते थे,
इस मन के जो मनुहारे थे,
विप्लव के काले बादल ने,
उन सबको है तोड़ दिया,
पत्तों वाला वो आशियाना भी,
काले बादल ने तोड़ दिया,
जिनको तुमने सूरज माना ,
चंदा के संग तारा जाना,
वो दिनकर के संग डूब गए,
तारों के संग टूट गए,
वो काल के संग छूट गए,
विपदा के संग वो टूट गए,
विप्लव के दीपक प्रौढ़ रे,
चल अपने पथ की ओर रे!!!!
#vatsalyshyam
परिचय नाम-सुधांशु तिवारी "वात्सल्य श्याम" मोबाइल नंबर- 8858986989 सोशल मीडिया- vatsalyshyam
बुधवार, 14 मार्च 2018
विप्लव के दीपक प्रौढ़ रे..........
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
-
वो आज रो रही थी! कौन?? अरे वही!जिसके बग़ैर, आजकल मुझे जीना नही आता है, वही जो मेरी हर बात को, दिल से लगाती है, अरे पागल और कौन वही, ज...
-
इक लड़की थी, जो शर्माती थी, मेरे ख्याब में अक्सर आती थी, कभी हसती थी, कभी गाती थी, वो हर रंग में भाती थी, वो बोली थी जरा सुनते हो, सपने ...
-
अबकी हमने उससे , न बात करने की कसम खाई है, ख्याबो में आती है, तो आने दो, पर हक़ीक़त में मुलाकात, न करने की कसम खाई है, वो हमको ग़ैर भी नह...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें